Parents affection for children

Sabki zindgi me ek Sunday hota h Jis din Wo aaram se so kr utha h ya thodi der tak Sona chata h but sadly meri Zindagi me abi tak Koi esa Sunday aaya hi nhi h Jis din Wo Sunday Ho I wish m bhi apni life comfortably ji paati. Life me struggle Etna h ki Kabi khtam hi nhi hota. Aaj aankh zaldi khul gyi thi Uske baad neend hi nhi aayi Qki mind me etni tensions chal rhi thi. Family problems and solutions but kya Wo solution shi h bus yhi sab. But Aaj m apni beti ki study ko lekr zyada tense thi Bilkul Wse hi jse her parent hota h apne Bcchoo ki study ko lekr. Mne apni beti ki life ko ek best direction dene ki liye Uske Admison pr apni Puri savings lga di. M nhi jaanti ki mne Kitna shi kiya or Kitna glat.pr m use ek Achaa future Dena chati thi esliye apni Puri saving bina soche Smjhe lga di. But now I feel Khni mne zaldbazi to nhi kr di, shayd use to eashaas bhi nhi h ki mne kya kiya h use ek Achaa Bhavishay dene ke liye, really kya sabi Bcche Etne hi insensitive hote h ? Kya sabi bccho ko yhi lgta h ki ye to parents ki duty h unki study pr spend krna? wo bhi apni limit se bhar jaakr krna. I don’t know kal Kya hone wala h meri beti apni study ko lekr mujhe Kya result dene wali h but etna zrur smjh aa gya ki bccho ke liye had se zyada affection rkhna parents ke liye glat h unhe Unke hisse ka struggle krne Dena chaiye, chahe fir wo usme paas ho ya fail. Jab tak wo sturgel nhi krenge failier nhi dekhenge unhe na to hard work ka matlab smjh ayega or na hi success ka. Success mantaione rkhne ke liye failier dekhna zruri h. Kya lgta h aapko Kya aap meri baat se agree krte h?

नवरात्रि कुछ सिखाने के लिये ।

नवरात्रि का त्यौहार चारों तरफ अपनी चमक बिखेर चुका है हर तरफ लोग माँ की भक्ति में लीन नजर आ रहे है माता के मन्दिर रोशनी से एसे जगमगा रहे जैसे मानो मन्दिर के चारों तरफ सूरज निकल आए है अगरबत्ती की महक ,कपूर और लौंग को जलाने पर उन से आने वाली खुशबु और माँ को अरपण कीये गए फूलों से आने वाली सुगन्ध पूरे वातावरण को पवित्र कर रही है और वहाँ आने वाला परत्येक वयक्ति एक अलग ही दुनिया में खो जाता है जहाँ बस वह और उसकी माता रानी होती है जहाँ वह अपनी माँ के सामने अपना दिल खोलकर रख देता है इस उम्मीद में की माता रानी उसको और उसकी हर बात को समेझेगी, और मन्दिर से जाते हुए वह वहाँ से ढेर सारा संतोष और उम्मीद लेकर जाता है कि माता रानी उसकी सारी परेशानियाँ खत्म करेगीं ,पर क्या माँ को खुश करने के लिये इतना काफी है कि आप रोज मन्दिर जाओ और पूजा अरचना करो,या फिर घर को ही मन्दिर बना कर उनकी रोज अराधना करो ताकि आप उन से अपनी मनोकामना पूरी करवा सको ,और अगर आपकी वह मनोकामना पूरी नहीं होती तो माँ से नाराज होकर उनकी पूजा अरचना करना ही बन्द कर दो। सारा आरोप माता रानी पर डालकर कि देखो हमने तो आपकी कितनी भक्ति की थी कितना पूजा पाठ किया था पर आपने तो हमारी सुनी ही नहीं,सचमुच ??? क्या एेसा ही है ?उन्होने आपकी मनोकामना पूरी नहीं की ,या आप से ही कोई गलती हुई है सोचिये जरा ,कहीं आप किसी का दिल तो नहीं दुखा रहे जाने अजानें।एक तरफ तो आप माँ की अराधना कर रहें है और दूसरी तरफ आप किसी औरत का या किसी बुजुरग का अपमान कर रहे है या फिर किसी को जान बूझकर सता रहे है या किसी के हक के रूपये उसे नही दे रहे या कोई भी और अन्य अनैतिक काम ,ये सोचकर कि आपके पूजा पाठ आपके सारे बुरे करमों को खत्म कर देगा ,अगर एेसा है तो गलत सोचते हैं आप क्योकिं गलत काम करने पर माँ कभी खुश नहीं होती ,अगर आप के करम अच्छे है ,आपकी सोच अच्छी है लोगों को लेकर तो आपकी पूजा अरचना ,सोने पर सुहागे की तरह काम करती है आपके अच्छे करम और माँ के लिये की गई अराधना से माँ बहुत जल्दी खुश होती है और उनकी सभी मनोकामनाँए पूरी करती है , तो धयान रखिये अगर आप सच मे माँ की आशिर्वाद चाहते है तो लोगों के बारे में अच्छा सोचिये ,जरुरतमन्द लोगों की मदद किजिये बच्चों के साथ प्यार से पेश आईये ,किसी का भी दिल न दुखाये सिरफ नवरात्रि में ही नहीं बल्कि रोज की जिन्दगीं में भी , फिर देखिये कैसे माता रानी आप पर अपना आशिर्वाद खुशियों के रूप में बरसाती हैं।